Tariffs पर US Supreme Court का बड़ा फैसला (Big Ruling)

US Supreme Court

अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने 20 फरवरी 2026 को एक ऐतिहासिक फैसले में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए व्यापक टैरिफ को अवैध घोषित कर दिया। यह फैसला 6-3 के बहुमत से आया, जिसमें मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने कहा कि इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं देता।

फैसले का मुख्य आधार:

कोर्ट ने पाया कि ट्रंप ने 1977 के इस आपातकालीन कानून का दुरुपयोग किया, जो आयात को नियंत्रित करने की बात करता है लेकिन टैरिफ लगाने की अनुमति नहीं देता। यह टैरिफ चीन, भारत, मेक्सिको समेत लगभग सभी देशों के सामानों पर लगाए गए थे, जो फेंटेनिल संकट और व्यापार असंतुलन के नाम पर थे। निचली अदालतों के फैसलों को बरकरार रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि टैरिफ लगाने का अधिकार कांग्रेस के पास है, न कि राष्ट्रपति के एकतरफा।

प्रभाव और आंकड़े:

इस फैसले से IEEPA के तहत लगाए गए टैरिफ रद्द हो गए, जिनसे 2025 से जनवरी 2026 तक करीब 165 अरब डॉलर का राजस्व आया था। अब आयातकों को अरबों डॉलर के रिफंड का दावा करने का रास्ता मिला है, हालांकि प्रक्रिया लंबी हो सकती है। भारत जैसे देशों पर पहले 25% से बढ़ाकर 50% तक पहुंचे टैरिफ अब कम हुए, लेकिन ट्रेड डील के बाद यह 18% था।

ट्रंप प्रशासन की प्रतिक्रिया:

फैसले के तुरंत बाद ट्रंप ने ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 122 के तहत 10% का अस्थायी ‘इम्पोर्ट सरचार्ज’ लगाया, जो 24 फरवरी 2026 से 150 दिनों के लिए है और बढ़ाकर 15% करने की योजना है। इसमें कनाडा-मेक्सिको के USMCA सामान, दवाएं और इलेक्ट्रॉनिक्स छूट प्राप्त हैं, जबकि धातु-वाहनों पर पुराने टैरिफ बने रहेंगे। 24 जुलाई 2026 के बाद इसे बढ़ाने के लिए कांग्रेस की मंजूरी जरूरी होगी, जो मिडटर्म चुनावों के कारण अनिश्चित है।

वैश्विक व्यापार पर असर:

यह फैसला अमेरिकी उपभोक्ताओं के लिए राहत लाएगा, क्योंकि औसत टैरिफ दर 16% से घटकर 9.1% हो सकती है, लेकिन अभी भी 1947 के बाद सबसे ऊंची रहेगी। चीन और भारत जैसे देशों को फायदा होगा, जबकि यूरोपीय संघ और जापान को चुनौतियां। कुल मिलाकर, वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता बढ़ी है, लेकिन बाजारों में अस्थिरता अपेक्षाकृत कम रही।

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