हमारे और आपके घर की रसोई में जलने वाली एलपीजी गैस सिर्फ एक गैस सिलेंडर नहीं है बल्कि यह एक बहुत बड़ी अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन का हिस्सा है। आज हम आपको आसान भाषा में बताएंगे कि यह गैस कहाँ से आती है इसे कौन भारत लाता है और आपके घर तक पहुँचने से पहले इसके दाम कैसे तय होते हैं। साल 2026 में दुनिया भर में जो उथल पुथल मची है उसका सीधा असर हमारी रसोई पर भी पड़ रहा है।

सबसे पहले बात करते हैं कि यह गैस आती कहाँ से है। भारत अपनी जरूरत की पूरी गैस खुद नहीं बनाता। करीब 40 प्रतिशत गैस हमारे देश के अंदर ही रिफाइनरी और गैस फील्ड से बनती है जबकि बाकी 60 प्रतिशत गैस हमें विदेशों से खरीदनी पड़ती है। पहले हम अपनी जरूरत की ज्यादातर गैस खाड़ी देशों जैसे सऊदी अरब कतर और यूएई से मंगाते थे। लेकिन अब दुनिया के हालात बदल रहे हैं। ईरान युद्ध और समुद्री रास्तों में आए तनाव के कारण भारत ने अपनी रणनीति बदली है। अब हम अमेरिका रूस नॉर्वे और अर्जेंटीना जैसे देशों से भी गैस खरीद रहे हैं ताकि किसी एक जगह पर निर्भर न रहना पड़े।

विदेशों से यह गैस बहुत बड़े जहाजों में भरकर भारत के समुद्री बंदरगाहों तक आती है। कांडला दाहेज और मंगलौर जैसे बंदरगाहों पर इसे उतारा जाता है। इसके बाद गैस को बड़े टैंकों में सुरक्षित रखा जाता है। फिर यहाँ से पाइपलाइन ट्रेन और ट्रकों के जरिए गैस को बॉटलिंग प्लांट तक भेजा जाता है। बॉटलिंग प्लांट वही जगह है जहाँ खाली सिलेंडरों में गैस भरी जाती है। इसके बाद देश भर में फैले हजारों डीलरों के जरिए यह लाल सिलेंडर हमारे और आपके घरों तक पहुँचता है।

अब यह जानना भी जरूरी है कि भारत में यह पूरा काम कौन संभालता है। देश में एलपीजी का बाजार लगभग पूरी तरह से सरकारी कंपनियों के हाथ में है। इंडियन ऑयल भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम मिलकर पूरे बाजार का लगभग 99 प्रतिशत हिस्सा संभालती हैं। इन कंपनियों के लाखों डिस्ट्रीब्यूटर हैं जो गांव गांव और शहर शहर गैस पहुंचाने का काम करते हैं।

गैस की कीमत कैसे तय होती है यह समझना भी बहुत जरूरी है। इसकी कीमत कोई एक चीज तय नहीं करती। अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमत क्या है डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति क्या है जहाज से लाने का खर्च बॉटलिंग और ट्रांसपोर्ट का खर्च इन सब को मिलाकर एक बेस प्राइस बनता है। इसके बाद सरकार के टैक्स और डीलर का कमीशन जुड़ता है। अगर सरकार चाहे तो आम जनता को राहत देने के लिए सब्सिडी देती है जिससे सिलेंडर सस्ता हो जाता है।

मार्च 2026 के ताजा हालात की बात करें तो दुनिया भर में चल रहे तनाव के कारण सप्लाई पर थोड़ा दबाव पड़ा है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस महंगी हुई है। इसी वजह से हाल ही में गैस के दाम थोड़े बढ़े हैं। लेकिन अच्छी बात यह है कि सरकार ने तेजी से कदम उठाते हुए देश के अंदर गैस का उत्पादन बढ़ा दिया है और अमेरिका जैसे देशों से नए समझौते किए हैं। इसलिए सरकार ने साफ कर दिया है कि देश में गैस की कोई कमी नहीं है और आम जनता को घबराने की जरूरत नहीं है। आने वाले समय में सरकार पाइप वाली गैस को भी तेजी से बढ़ा रही है ताकि बाहर से आने वाले सिलेंडरों पर हमारी निर्भरता कम हो सके।

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By Nikee Kumari

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