लेखक: मनोज बाबू अप्रैल का महीना पंजाब जैसे इलाकों में रबी फसल की कटाई का समय होता है। गेहूं, सरसों, चना आदि की कटाई हो चुकी होती है और खेत खाली हो जाते हैं। इस बीच जायद (ग्रीष्मकालीन) फसलों की तैयारी शुरू हो जाती है। अप्रैल गर्मी की शुरुआत है, तापमान 30-40 डिग्री तक पहुंच जाता है, इसलिए ऐसी फसलें चुननी चाहिए जो गर्मी सहन कर सकें और कम समय में तैयार हो जाएं। अगर आप पठानकोट या आसपास के क्षेत्र से हैं तो अच्छी सिंचाई की व्यवस्था रखें क्योंकि गर्म हवाएं और सूखा पड़ सकता है। यह समय किसानों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि सही चुनाव से कम समय में अच्छी कमाई की जा सकती है।अप्रैल में मुख्य कृषि गतिविधियांरबी फसलों की कटाई: गेहूं की कटाई अप्रैल में पूरी हो जाती है। कटाई के बाद खेत की गहरी जुताई करना जरूरी है। इससे पुरानी फसल के अवशेष साफ हो जाते हैं और मिट्टी में हवा का संचार बढ़ता है। जुताई के बाद खाद डालकर मिट्टी तैयार करें।जायद फसलों की बुवाई: रबी कटाई के बाद लगभग 50-60 दिन तक खेत खाली रहते हैं। इस खाली समय का सदुपयोग करने के लिए छोटी अवधि वाली सब्जियां, दालें और फल वाली फसलें लगाई जा सकती हैं। यह जून में धान या मक्का की बुवाई से पहले कमाई का एक बेहतरीन मौका देता है।बागवानी और नर्सरी: गर्मी के मौसम में फलों के पौधों (जैसे आम, लीची आदि) की विशेष देखभाल करें। सब्जियों की नर्सरी इसी महीने लगाएं ताकि तापमान बढ़ने से पहले पौधे तैयार हो जाएं और बाद में उनकी रोपाई आसान हो सके।अप्रैल में बोई जाने वाली मुख्य फसलें और सब्जियांपंजाब और उत्तर भारत की जलवायु को देखते हुए अप्रैल के लिए ये फसलें सबसे उपयुक्त हैं: 1. भिंडी (Okra/Ladies Finger): यह गर्मी की सबसे भरोसेमंद फसल है। अप्रैल के पहले या दूसरे सप्ताह में बुवाई करें। 45-60 दिन में तैयार। अच्छी पैदावार के लिए हाइब्रिड किस्में जैसे पूसा नसदार या हरिता। 2. लौकी और तोरई/गिल्की: बेल वाली सब्जियां जो गर्मी में तेजी से बढ़ती हैं। अप्रैल में बीज बोएं और मचान का सहारा दें। 50-60 दिन में कटाई शुरू।3. खीरा, ककड़ी और तरबूज/खरबूजा: जायद की मुख्य नकदी फसलें। तरबूज और खरबूजा 70-90 दिन में तैयार होते हैं। नियमित सिंचाई बहुत जरूरी है।4. बैंगन (Brinjal): गर्मी सहन करने वाली किस्में चुनें। रोपाई के 60-80 दिन बाद फल आने शुरू हो जाते हैं।5. मिर्च और शिमला मिर्च (Capsicum): अप्रैल में नर्सरी तैयार करना या रोपाई करना फायदेमंद रहता है।6. धनिया और पालक (सीमित): इन्हें 15 अप्रैल तक बो दें। बाजार में गर्मियों में धनिया का भाव बहुत अच्छा मिलता है।7. मूंग और उड़द (दालें): खाली खेतों में दालें बोने से मिट्टी की ताकत बढ़ती है। 60-70 दिन में फसल तैयार।8. मक्का (Maize): पंजाब के लिए ‘साठी’ मक्का सबसे उपयुक्त है। 70 दिन में तैयार और पशु चारे के लिए बढ़िया।9. अन्य फसलें: टिंडा, करेला, लोबिया, फ्रेंच बीन और गवार फली। सूरजमुखी के फूल भी लगा सकते हैं। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook Like this:Like Loading…Relatedपोस्ट नेविगेशनआधुनिक भारत में कम लागत में ज्यादा मुनाफा देने वाली फसलें और उनका विस्तार से विश्लेषण भिंडी की खेती: पंजाब और उत्तर भारत के किसानों के लिए आसान और लाभदायक तरीका